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उत्तराखण्ड

डिजिटल जनगणना के नाम पर साइबर ठगी का नया खेल सामने आया।

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डिजिटल जनगणना के नाम पर साइबर ठगी का नया खेल सामने आया है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि अगर कोई व्यक्ति खुद को “डिजिटल जनगणना अधिकारी” बताकर आपसे ओटीपी, बैंक डिटेल या क्यूआर कोड स्कैन करने को कहता है, तो यह सीधे-सीधे ठगी का प्रयास है।

साइबर अपराधी इन दिनों फर्जी कॉल, मैसेज और लिंक के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे खुद को सरकारी अधिकारी बताकर संपर्क करते हैं और एक ऐसी वेबसाइट या लिंक भेजते हैं जो देखने में बिल्कुल असली सरकारी पोर्टल जैसी लगती है। यहीं से शुरू होता है ठगी का पूरा खेल। नैनीताल पुलिस के साइबर एक्सपर्ट बिहारी लाल कुशवाहा के अनुसार, ठग “वेरीफिकेशन” के नाम पर लोगों से ओटीपी साझा करने को कहते हैं या क्यूआर कोड स्कैन कराते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति यह जानकारी देता है, कुछ ही मिनटों में उसके बैंक खाते से रकम साफ हो जाती है। पुलिस ने साफ किया है कि जनगणना की प्रक्रिया पूरी तरह ऑफलाइन होती है और इसके लिए अधिकारी घर-घर

क्या करें, क्या नहीं

जनगणना केवल घर-घर जाकर होती है, किसी कॉल या लिंक से नहीं

किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें

ओटीपी, बैंक डिटेल या क्यूआर कोड स्कैन बिल्कुल न करें

सरकारी वेबसाइट का डोमेन हमेशा gov.in होता है

शिकायत कहां करें

साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930

ऑनलाइन शिकायत के लिए https://cybercrime. gov.in या https:// cybercrime.gov.in

जाकर ही जानकारी जुटाते हैं। फोन, लिंक या ऑनलाइन माध्यम से इस तरह की जानकारी नहीं मांगी जाती। आईजी कुमाऊं रिद्धिम अग्रवाल ने कहा कि साइबर ठग हर अभियान को ठगी का जरिया बना रहे हैं, ऐसे में जागरूक रहना जरूरी है।

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